Aurat Jumme Ki Namaz Kaise Padhe: इस्लाम में जुमे का दिन सबसे अफजल माना जाता है। हजरत मुहम्मद ने फरमाया कि, जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार है। इसे ईद की तरह की विशेष माना जाता है। वहीं जुमा जब रमजान में पड़े तो उसकी फज़ीलत और अधिक बढ़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि, जुमे के दिन की गई दुआएं खास कबूल होती हैं और अल्लाह बंदे के गुनाहों की मगफिरत करते हैं। आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे एक ऐसे सवाल की जो अक्सर मुस्लिम महिलाओं के मन में आता है — क्या औरतों के लिए जुम्मा की नमाज़ पढ़ना जरूरी है? और अगर पढ़ें तो कैसे पढ़ें?